प्रायिकता : योग प्रमेय & गुणन प्रमेय
Probability : Addition & Multiplication theorem
प्रायिकता : सामान्यत: प्रायिकता द्वारा घटनाओं की अनिश्चितता का वर्णन किया जाता है।
परिभाषा : अनुकूल घटनाओं का सामान संभावना वाली समस्त घटनाओं के साथ अनुपात ही प्रायिकता है।
उदाहरण: एक सिक्का उछालने पर दो परिणाम हो सकते हैं : एक चित् और दूसरा पट । यदि चित गिरने की प्रायिकता ज्ञात करनी हो तो यह अनुपात ½ होगा और पट गिरने की प्रायिकता ज्ञात करनी हो तो यह अनुपात ½ होगा।
गणितीय परिभाषा: यदि कुल घटनाएं n है और अनुकूल घटनाएं m है तो प्रायिकता m/n होगी।
1.योग प्रमेय ( Addition theorem)
घटनाएं दो प्रकार की होती हैं :
(I) परस्पर अपवर्जी घटनाएं हो
(II) परस्पर अपवर्जी घटनाएं ना हो
यदि दो घटनाओं के मध्य ‘या' शब्द का प्रयोग होता है तो योग प्रमेय का प्रयोग किया जाता है।
A.परस्पर अपवर्जी घटनाएं हो (Mutually exclusive events) : यदि दो घटनाएं A एवं B परस्पर अपवर्जी हैं तो उसमें से किसी एक घटना की प्रायिकता उनमें से प्रत्येक के घटित होने की प्रायिकता का योग होती हैं । इसमें कोई उभयनिष्ठ समान अवयव नहीं होता है।
सूत्रानुसार :
P ( A or B) = P(A) + P(B)
P ( A or B or C) = P(A) + P(B) + P(C)
सारांश रूप में कह सकते हैं कि जब दो या अधिक घटनाओं में ‘या' अथवा or शब्द का प्रयोग किया जाता है तो वहां योग प्रमेय का उपयोग किया जाता है ।
उदाहरण : 52 ताश के पत्तों की गड्डी में से एक पत्ता देविक रुप से निकाला जाता है । इसके इक्का या बादशाह होने की क्या प्रायिकता है ?
Ans. : 52 ताश के पत्तों में से 4 इक्के एवं 4 बादशाह होते हैं। क्योंकि इक्का आने की प्रायिकता P(A) = 4/52 तथा बादशाह होने की प्रायिकता P(B) = 4/52
अतः: इक्का या बादशाह होने की प्रायिकता
4/52 + 4/52 = 8/52 = 2/13
B.परस्पर अपवर्जी घटनाएं न हो ( Not Mutually exclusive events)
जब घटनाएं पूर्ण रूप से अपवर्जी न हो अथवा उनमे कोई समान अंश हो तो उसकी प्रायिकता को व्यक्तिगत प्रायिकता के योग में से घटाया जाता है।
P ( A U B) = P(A) + P(B) -P(A ^B)
दो से अधिक घटनाएं होने पर
उदाहरण : ताश की गड्डी में से एक हुकुम का पत्ता या एक बादशाह निकाले जाने की क्या प्रायिकता होगी ?
Ans. 52 ताश के पत्तों में हुकम के 13 पत्ते तथा 4 बादशाह होते हैं जिसमें एक हुकम का बादशाह भी है!
हुकम का पत्ता निकाले जाने की प्रायिकता = 13/52
बादशाह निकाले जाने की प्रायिकता = 4/52
हुकम का बादशाह निकाले जाने की प्रायिकता = 1/52
अतः निकाला गया पता हुकुम का या एक बादशाह होने की प्रायिकता
P ( A or B) = P(A) + P(B) -P(A ^ B)
= 13/52 + 4/52 – 1/52 = 16/52 = 4/13
2.गुणन प्रमेय ( Multiplication theorem)
जब स्वतंत्र घटनाओं के एक साथ घटने की प्रायिकता ज्ञात करनी हो तो गुणन प्रमेय का प्रयोग किया जाता है। प्रत्येक स्वतंत्र घटना की अलग-अलग प्रायिकता ज्ञात करके उनका गुणनफल करना ही गुणन प्रमेय है ।
जहां घटनाओं के मध्य ‘और' शब्द का प्रयोग किया जाता है वहां गुणन प्रमेय का प्रयोग किया जाता है।
P ( A and B) = P(A) × P(B)
इसमें दो घटनाएं होती हैं:
स्वतंत्र घटनाएं & आश्रित घटनाएं
स्वतंत्र घटनाएं ( Independent events) :
यदि एक घटना के घटित होने का दूसरी घटना के घटित होने पर कोई प्रभाव ना पड़े तो ऐसी घटनाएं स्वतंत्र होती हैं।
उदाहरण : एक थैले में 6 लाल, 5 काली गेंद है। इसमें से एक गेम निकाली जाती है तथा रंग देखने के बाद पुनः थैली में रख दी जाती है । उसके बाद पुनः एक गेंद निकाली जाती हैं। इसकी क्या प्रायिकता है –
A. दोनों गेंद लाल हो
B. दोनों गेंद काली
C. पहली लाल तथा दूसरी गेंद काली
D. पहली गेंद काली तथा दूसरी गेंद लाल हो।
हल : एक गेंद निकालने से पूर्व, पहली बार में निकाली गई गेंद पुनः थैले में रख दी जाती है। अतः दोनों घटनाएं स्वतंत्र हैं यहां दो घटनाओं के एक साथ घटने की प्रायिकता पूछी गई हैं अतः गुणन प्रमेय का प्रयोग किया जाएगा ।
दोनों गेंद लाल हो
6/11 × 6/11 = 36/121
दोनों गेंद काली
5/11 × 5/11 = 25/121
पहली लाल तथा दूसरी गेंद काली
6/11 × 5/11 = 30/121
पहली गेंद काली तथा दूसरी गेंद लाल हो।
5/11 × 6/11 = 30/121
दो बार गेंद निकालने पर कुल 4 ही परिस्थितियां हो सकते हैं तथा घटनाएं परस्पर अपवर्जी हैं अतः इनका योग
36/121 + 25/121 + 30/121 + 30/121 = 1 होगा
आश्रित घटनाएं (Dependent events)
दी गई घटनाओं में से किसी घटना के घटित होने का दूसरी घटना पर प्रभाव होता है तो ऐसी स्थिति में आश्रित घटनाएं होती है।
P ( A and B) = P(A) × P(B/A)
उदाहरण: ताश की एक गड्डी में से एक एक करके दो पत्ते निकाले जाते हैं तथा पहली बार निकाला गया पत्ता ताश की गड्डी में वापस नहीं रखते हैं तो यह घटना आश्रित घटना है।
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